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28 अगस्त 2017

कालचक्र

एक ओल्ड ऐज होम, वहाँ एक कमरे के बाहर, एक आदमी और एक लेडी डॉ, " देखिये मैंने आपकी माँ का चेकअप कर लिया है.... वो अब कुछ दिनों की ही मेहमान हैं.. मै कुछ मेडिसन लिख रही हूँ.. इनसे उन्हें कम तकलीफ होगी... और हाँ मेरी फीस है 1200 रूपए " डॉ ने उस आदमी से कहा, डॉ की बात सुनकर वो चौंकते हुए बोला " 1200 रूपए... फीस ??? " " जी हां... मै अपना क्लीनिक छोड़ कर यहाँ आई हूँ " डॉ ने बुरा सा मुँह बना कर कहा, उस आदमी ने अनमने मन से डॉ को फीस दी और फिर सामने के कमरे मे चला गया, वो एक छोटा सा कमरा था, सामने एक बेड पर एक बूढी महिला लेटी थीं, बेड के बराबर मे स्टूल पर एक टेबल फैन रखा था जो उन बूढी महिला की तरह ही बूढा लग रहा था, उसकी हवा फेंकने की रफ़्तार से लग रहा था जैसे वो भी अपने अंतिम समय का इंतज़ार कर रहा हो|

8 जून 2016

धन, सफलता और प्रेम

एक औरत ने तीन संतों को अपने घर के सामने देखा। वह उन्हें जानती नहीं थी। औरत ने कहा – “कृपया भीतर आइये और भोजन करिए।” संत बोले – “क्या तुम्हारे पति घर पर हैं?” औरत – “नहीं, वे अभी बाहर गए हैं।” संत –“हम तभी भीतर आयेंगे जब वह घर पर हों।” शाम को उस औरत का पति घर आया और औरत ने उसे यह सब बताया।

पति – “जाओ और उनसे कहो कि मैं घर आ गया हूँ और उनको आदर सहित बुलाओ।” औरत बाहर गई और उनको भीतर आने के  लिए कहा। संत बोले – “हम सब किसी भी घर में एक साथ नहीं जाते।” “पर क्यों?” – औरत ने पूछा। उनमें से एक संत ने कहा – “मेरा नाम धन है |”

फ़िर दूसरे संतों की ओर इशारा कर के कहा – “इन दोनों के नाम सफलता और प्रेम हैं। हममें से कोई एक ही भीतर आ सकता है। आप घर के अन्य सदस्यों से मिलकर तय कर लें कि भीतर किसे निमंत्रित करना है।”

25 अप्रैल 2016

परिश्रम और भाग्य की चाबी

एक पान वाला था। जब भी पान खाने जाओ ऐसा लगता कि वह हमारा ही रास्ता देख रहा हो। हर विषय पर बात करने में उसे बड़ा मज़ा आता। कई बार उसे कहा की भाई देर हो जाती है जल्दी पान लगा दिया करो पर उसकी बात ख़त्म ही नही होती। एक दिन अचानक कर्म और भाग्य पर बात शुरू हो गई।  तक़दीर और तदबीर की बात सुन मैनें सोचा कि चलो आज उसकी फ़िलासफ़ी देख ही लेते हैं। मैंने एक सवाल उछाल दिया।
 
मेरा सवाल था कि आदमी मेहनत से आगे बढ़ता है या भाग्य से? और उसके जवाब से मेरे दिमाग़ के सारे जाले ही साफ़ हो गए। कहने लगा,आपका किसी बैंक में लाकर तो होगा? उसकी चाभियाँ ही इस सवाल का जवाब है। हर लाकर की दो चाभियाँ होती हैं। एक आप के पास होती है और एक मैनेजर के पास। आप के पास जो चाभी है वह है परिश्रम और मैनेजर के पास वाली भाग्य। जब तक दोनों नहीं लगतीं ताला नही खुल सकता। आप कर्मयोगी पुरुष हैं ओर मैनेजर भगवान। 

19 अप्रैल 2016

माँ तो बस माँ होती है

आधी रात को बहुत बारिश हो रही थी। अजय और उसकी बीवी प्रिया एक मित्र की पार्टी से अपनी गाडी से घर वापस लौट रहे थे.. बारिश की वजह से अजय बहुत धीमी गति से गाड़ी चला रहा था, तभी अचानक बिजली गिरी.. बिजली की रोशनी में अजय को गाड़ी के सामने एक बदहवास सी एक औरत दिखाई दी.. अजय ने गाड़ी रोक दी..! गाड़ी रुकने पर उसकी बीवी ने कहा :- क्या हूआ..? गाड़ी क्यों रोक दी..? 

अजय ने आगे की ओर इशारा किया। प्रिया ने आगे देखा तो वो डर गयी, क्यों कि गाड़ी के सामने एक औरत खड़ी थी। वो औरत गाड़ी के पास आयी, और हाथ से गाड़ी का शीशा नीचे करने का इशारा करने लगी। अजय की बीवी प्रिया काफी डर गयी थी, उसने अजय को गाडी चलाने को कहा, लेकिन गाड़ी भी स्टार्ट नही हुईं। गाड़ी के बाहर खडी औरत बारिश की वजह से भींग गयी थी। वो हाथ जोडकर गाड़ी का शीशा नीचे करने का इशारा कर रही थी।

18 अप्रैल 2016

जैसा खाओ अन्न वैसा होवे मन

बासमती चावल बेचने वाले एक सेठ की स्टेशन मास्टर से साँठ-गाँठ हो गयी। सेठ को आधी कीमत पर बासमती चावल मिलने लगा।

सेठ ने सोचा कि इतना पाप हो रहा है , तो कुछ धर्म-कर्म भी करना चाहिए। एक दिन उसने बासमती चावल की खीर बनवायी और किसी साधु बाबा को आमंत्रित कर भोजनप्रसाद लेने के लिए प्रार्थना की ।

साधु बाबा ने बासमती चावल की खीर खायी। दोपहर का समय था। सेठ ने कहाः "महाराज ! अभी आराम कीजिए। थोड़ी धूप कम हो जाय फिर पधारियेगा। साधु बाबा ने बात स्वीकार कर ली। 

सेठ ने 100-100 रूपये वाली 10 लाख जितनी रकम की गड्डियाँ उसी कमरे में चादर से ढँककर रख दी। साधु बाबा आराम करने लगे। खीर थोड़ी हजम हुई। साधु बाबा के मन में हुआ कि इतनी सारी गड्डियाँ पड़ी हैं, एक-दो उठाकर झोले में रख लूँ तो किसको पता चलेगा ? साधु बाबा ने एक गड्डी उठाकर रख ली।

18 मार्च 2016

खूबसूरत सेक्रेटरी - जोक

बॉस ने एक चुलबुली, निहायत ही खूबसूरत सेक्रेटरी को काम पर रखा।
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लेकिन 10 दिन बाद ही 27वें माले से कूद कर बॉस ने आत्महत्या कर ली ।
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इंस्पेक्टर :-"कमरे में उस वक़्त कौन मौज़ूद था ?
सेक्रेटरी:- "जी,...मैं थी।
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इंस्पेक्टर :- "आख़िर हुआ क्या? उसने ख़ुदकुशी क्यूँ की?
सेक्रेटरी:- "वह बहुत अच्छे इंसान थे। एक दिन उन्होंने मुझे 2 लाख रुपये का ड्रेस उपहार में दिया ..
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फिर एक दिन उन्होंने मुझे 15 लाख की कीमत वाला हीरों का हार खरीद कर दिया।
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परसों ही वह मेरे लिए 5 लाख की हीरे की अंगूठी ले कर आए थे।
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यह रही मेरी उंगली में।
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इंस्पेक्टर :- "फिर।
सेक्रेटरी:- "आज उन्होनें मुझे शादी के लिए प्रपोज किया।

29 नवंबर 2015

समर्पण

एक बार किसी देश का राजा अपनी प्रजा का हाल-चाल पूछने के लिए गावो में घूम रहा था | घूमते-घूमते उसके कुर्ते का बटन टूट गया उसने अपने मंत्री को कहा कि पता करो की इस गांव में कौन सा दर्जी हैं जो मेरे बटन को सिल सके |

मंत्री ने पता किया उस गांव में सिर्फ एक ही दर्जी था जो कपडे सिलने का काम करता था| उसको राजा के समाने ले जाया गया राजा ने कहा की तुम मेरे कुर्ते का बटन सी सकते हो | दर्जी ने कहा यह कोई मुश्किल काम थोड़े ही है उसने मत्री से बटन ले लिया, धागे से उसने राजा के कुर्ते का बटन फौरन सीं दिया |

10 अप्रैल 2015

ईश्वर का कार्य

एक बार श्री कृष्ण और अर्जुन भ्रमण पर निकले | तो उन्होंने मार्ग में एक निर्धन ब्राहमण को भिक्षा मागते देखा |अर्जुन को उस पर दया आ गयी और उन्होंने उस ब्राहमण को स्वर्ण मुद्राओ से भरी एक पोटली दे दी। जिसे पाकर ब्राहमण प्रसन्नता पूर्वक अपने सुखद भविष्य के सुन्दर स्वप्न देखता हुआ घर लौट चला | किन्तु उसका दुर्भाग्य उसके साथ चल रहा था, राह में एक लुटेरे ने उससे वो पोटली छीन ली। ब्राहमण दुखी होकर फिर से भिक्षावृत्ति में लग गया। 

अगले दिन फिर अर्जुन की दृष्टि जब उस ब्राहमण पर पड़ी तो उन्होंने उससे इसका कारण पूछा। ब्राहमण ने सारा विवरण अर्जुन को बता दिया, ब्राहमण की व्यथा सुनकर अर्जुन को फिर से उस पर दया आ गयी | अर्जुन ने विचार किया और इस बार उन्होंने ब्राहमण को मूल्यवान एक माणिक दिया। ब्राहमण उसे लेकर घर पंहुचा उसके घर में एक पुराण घड़ा था जो बहुत समय से प्रयोग नहीं किया गया था, ब्राह्मण ने चोरी होने के भय से माणिक उस घड़े में छुपा दिया। किन्तु उसका दुर्भाग्य, दिन भर का थका मांदा होने के कारण उसे नींद आ गयी, इस बीच ब्राहमण की स्त्री नदी में जल लेने चली गयी किन्तु मार्ग में ही उसका घड़ा टूट गया, उसने सोंचा, घर में जो पुराना घड़ा पड़ा है उसे ले आती हूँ, ऐसा विचार कर वह घर लौटी और उस पुराने घड़े को ले कर चली गई और जैसे ही उसने घड़े को नदी में डुबोया वह माणिक भी जल की धारा के साथ बह गया।

27 जनवरी 2015

मुझे नौकरी की जरुरत नहीं हैं !

एक छोटा बच्चा एक बड़ी दुकान पर लगे टेलीफोन बूथ पर जाता हैं | और मालिक से छुट्टे पैसे लेकर एक नंबर डायल करता हैं। दुकान का मालिक उस लड़के को ध्यान से देखते हुए उसकी बातचीत पर ध्यान देता हैं -

लड़का – मैडम क्या आप मुझे अपने बगीचे की साफ़ सफाई का काम देंगी ?
औरत – (दूसरी तरफ से) नहीं, मैंने एक दुसरे लड़के को अपने बगीचे का काम देखने के लिए रख लिया हैं।

लड़का – मैडम मैं आपके बगीचे का काम उस लड़के से आधे वेतन में करने को तैयार हूँ |
औरत – मगर जो लड़का मेरे बगीचे का काम कर रहा हैं उससे मैं पूरी तरह संतुष्ट हूँ।

29 नवंबर 2014

हिसाब बराबर

एक डॉक्टर ने नया-नया क्लीनिक खोला तो बाहर बोर्ड टाँग दिया, जिस पर लिखा था, "किसी भी बीमारी का इलाज़ मात्र 300/- रुपये में और अगर हम आपका इलाज़ नहीं कर पाये तो हम आपको 1000/- रुपये देंगे।"

यह बोर्ड पढ़कर एक दिन एक आदमी के मन में ख्याल आया कि क्यों न कोई चालाकी की जाये और 1000/- रुपये कमाये जाएँ। इसी सोच के साथ आदमी डॉक्टर के पास पहुँच गया।

डॉक्टर: आईये बैठिये, बताइये क्या तक़लीफ है आपको?

आदमी: डॉक्टर साहब, मैं अपना स्वाद खो चुका हूँ। कुछ भी खाता या पीता हूँ तो स्वाद का पता ही नहीं चलता।

3 नवंबर 2014

विजेता मेंढक

बहुत समय पहले की बात है एक सरोवर में बहुत सारे मेंढक रहते थे | सरोवर के बीचों-बीच एक बहुत पुराना धातु का खम्भा भी लगा हुआ था | जिसे उस सरोवर को बनवाने वाले राजा ने लगवाया था | खम्भा काफी ऊँचा था और उसकी सतह भी बिलकुल चिकनी थी |

एक दिन मेंढकों के दिमाग में आया कि क्यों ना एक रेस करवाई जाए | रेस में भाग लेने वाली प्रतियोगियों को खम्भे  पर चढ़ना होगा, और जो सबसे पहले एक ऊपर पहुच जाएगा वही विजेता माना जाएगा | रेस का दिन आ पहुँचा, चारो तरफ बहुत भीड़ थी, आस-पास के इलाकों से भी कई मेंढक इस रेस में हिस्सा लेने पहुचे | माहौल में सरगर्मी थी, हर तरफ शोर ही शोर था |

रेस शुरू हुई लेकिन खम्भे को देखकर भीड़ में एकत्र हुए किसी भी मेंढक को ये यकीन नहीं हुआ कि कोई  भी मेंढक ऊपर तक पहुंच पायेगा …

12 अप्रैल 2014

अन्धों की संख्या

एक दिन बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा- बीरबल जरा बताओ तो उस दुनिया में किसकी संख्या अधिक है, जो देख सकते हैं या जो अंधे हैं ? 

बीरबल बोले, इस समय तुरंत तो आपके इस सवाल का जबाब देना मेरे लिए संभव नहीं है लेकिन मेरा विश्वास है की अंधों की संख्या अधिक होगी बजाए देख सकने वालों की। बादशाह ने कहा- तुम्हें अपनी बात सिद्ध करके दिखानी होगी, बीरबल ने भी खुशी-खुशी बादशाह की चुनौती स्वीकार कर ली। 

अगले दिन बीरबल बीच बाजार में एक बिना बुनी हुई चारपाई लेकर बैठ गए और उसे बुनना शुरू कर दिया, उसके अगल-बगल दो आदमी कागज-कलम लेकर बैठे हुए थे। थोडी ही देर मे वहाँ भीड़ इकट्‍ठी हो गई, यह देखने के लिए कि यहाँ हो क्या रहा है। वहां मौजूद हर व्यक्ति ने बीरबल से एक ही सवाल पूछा- बीरबल तुम क्या कर रहे हो?

9 जनवरी 2014

जूता कैसे आया ?

एक बार की बात है एक राजा था। उसका एक बड़ा-सा राज्य था। एक दिन उसे देश घूमने का विचार आया और उसने देश भ्रमण की योजना बनाई और घूमने निकल पड़ा। जब वह यात्रा से लौट कर अपने महल आया। उसने अपने मंत्रियों से पैरों में दर्द होने की शिकायत की। राजा का कहना था कि मार्ग में जो कंकड़ पत्थर थे वे मेरे पैरों में चुभ गए और इसके लिए कुछ इंतजाम करना चाहिए।

कुछ देर विचार करने के बाद उसने अपने सैनिकों व मंत्रियों को आदेश दिया कि देश की संपूर्ण सड़कें चमड़े से ढक दी जाएं। राजा का ऐसा आदेश सुनकर सब सकते में आ गए। लेकिन किसी ने भी मना करने की हिम्मत नहीं दिखाई। यह तो निश्चित ही था कि इस काम के लिए बहुत सारे रुपए की जरूरत थी। लेकिन फिर भी किसी ने कुछ नहीं कहा। कुछ देर बाद राजा के एक बुद्धिमान मंत्री ने एक युक्ति निकाली। उसने राजा के पास जाकर डरते हुए कहा कि मैं आपको एक सुझाव देना चाहता हूँ। 

7 जून 2013

बीरबल के पिताजी

एक दिन बादशाह ने बीरबल को बुलाया और कहने लगे कि बीरबल तुम इतने होशियार हो तो तुम्हारे वालिद तो तुमसे भी ज्यादा अक्लमंद होंगे | मैं उनसे मिलना चाहता हूँ| बीरबल ने कहा कि सरकार वह देहात के रहने वाले सीधे साधे हैं | किंतु बादशाह ने कहा कि मेरी बड़ी इच्छा है कि उनके दर्शन करूँ| बीरबल ने बादशाह का मतलब समझ लिया और बोला कि अच्छी बात है | कुछ दिनों बाद उसने समाचार भेजकर अपने पिता को बुलाया | उनके लिये बहुत ही सुन्दर पोशाक बनवाया और समझाया कि पिता जी - बादशाह आपसे मिलना चाहता है | आप जब दरबार में जाइयेगा तो बादशाह को सलाम करके बैठ जाइयेगा | बादशाह आपसे कुछ भी पूछे – कोई उत्तर न दीजिएगा |

एक दिन बीरबल के पिता जी खूब सज धज कर दरबार में पहुँचे| बादशाह को खबर की गई कि बीरबल के पिता जी आये हैं | बादशाह थोड़ी देर में आया | उसे देखकर बीरबल के पिता जी ने सलाम किया और बैठ गए | बादशाह ने पूछा कि आप बीरबल के पिता हैं | पिताजी चुप थे | उसने फिर पूछा कि आप का नाम क्या है | वे अब भी चुप रहे और कुछ नहीं बोले | आगे बादशाह ने पूछा कि गाँव की खेती इस साल कैसी है ? पिता जी चुप रहे |

बादशाह ने दर्जनों सवाल किये किन्तु बीरबल के पिता ने जबान तक नहीं हिलाई | बादशाह खीज उठा और यह कहते हुए अन्दर चला गया कि किस मुर्ख से आज पाला पड़ा |

बादशाह के जाने के बाद बीरबल के पिता जी भी उठकर घर चले आये और उन्होंने बीरबल से सारी बातें बता दी | बीरबल ने कहा कि ठीक है | चार दिन बाद बीरबल दरबार पहुंचे तो अकबर बादशाह ने कहा अरे बीरबल सुनो तुमसे एक जरुरी बात करनी है | बीरबल करीब आये तो बादशाह ने कहा कि बीरबल - “यदि मूर्खों से पाला पड़ जाय तो क्या करना चाहिए”

इस पर बीरबल तपाक से बोल पड़ा कि ‘हुजूर, सरकार चुप रहना चाहिए’|

यह सुनकर बादशाह की आँखें नीची हो गयी|

6 मई 2013

बुद्धि का फल

एक रोज की बात है कि बादशाह अकबर के दरबार में लंका के राजा का एक दूत पहुँचा | उसने बादशाह अकबर से एक नयी तरह की माँग करते हुए कहा –“ आलमपनाह ! आपके दरबार में एक से बढ़कर एक बुद्धिमान , होशियार तथा बहादुर दरबारी मौजूद हैं | हमारे महाराज ने आपके पास मुझे एक घड़ा भरकर बुद्धि लाने के लिए भेजा है | हमारे महाराज को आप पर पूरा भरोसा है कि आप उसका बन्दोबस्त किसी-न-किसी तरह और जल्दी ही कर देंगे |”

यह सुनकर बादशाह अकबर चकरा गए |

उन्होंने अपने मन में सोंचा – “ क्या बेतुकी माँग है , भला घड़े भर बुद्धि का बन्दोबस्त कैसे किया जा सकता है ? लगता है | लंका का राजा हमारा मजाक बनाना चाहता है , कहीं वह इसमें सफल हो गया तो ...?

तभी बादशाह को बीरबल का ध्यान आया , वे सोचने लगे कि शायद यह कार्य बीरबल के वश का भी न हो, मगर उसे बताने में बुराई ही क्या है ?

जब बीरबल को बादशाह के बुलवाने का कारण ज्ञात हुआ तो वह मुस्कराते हुए कहने लगे – “ आलमपनाह ! चिन्ता की कोई बात नहीं , बुद्धि की व्यवस्था हो जाएगी , लेकिन इसमें कुछ हफ्ते का वक़्त लग सकता है |” 
बादशाह अकबर बीरबल की इस बात पर कहते भी तो क्या , बीरबल को मुँह माँगा समय दे दिया गया |

4 मई 2013

लालच का फल

किसी वन में एक शेर रहता था | शेर बहुत बूढ़ा था | उसके दांत गिर चुके थे | उसके नाखून गल गये थे तथा उसके शरीर में शिकार करने की शक्ति शेष नहीं बची थी | शेर शारीरिक दुर्बलता के कारण भूखा मरने लगा | शेर को एक युक्ति सूझी |

शेर के पास एक सोने का कड़ा था | शेर सोने का कड़ा लेकर रास्ते के किनारे एक तालाब में बैठ गया | उस मार्ग से जो भी राहगीर गुजरता , शेर उसे कड़े का लालच देता | शेर तो आखिर शेर होता है | उसके पास किसी की जाने की हिम्मत नहीं होती थी | उसे शाम हो गयी लेकिन कोई व्यक्ति उसके पास नहीं भय से नहीं आया | शाम के समय एक ब्राह्मण उधर से गुजरा | शेर ने ब्राह्मण से कहा , “ हे ब्राह्मण देवता ! मेरी बात सुनो , मैंने अपने जीवन में बहुत से पाप किये हैं और मै उनका पश्चाताप करना चाहता हूँ | मैं यह सोने का कंगन एक पवित्र आदमी को देना चाहता हूँ और वह तुम हो |”

ब्राह्मण बोला , “ मुझे क्या पागल समझते हो , मैं जैसे ही तुम्हारे पास आऊँगा , तुम मुझे मारकर खा जाओगे |” शेर बोला , “ नहीं ब्राह्मण देवता ! ऐसा नहीं हो सकता | मेरे नाखून गलकर टूट चुके हैं  तथा दांत भी गिर चुके हैं | इसलिए मैं तुम्हे नहीं मार सकता |” ब्राह्मण को शेर की बातों पर विश्वास हो गया | वह कड़ा लेने के लिए तालाब में पहुँच गया | शेर ने सोचा अच्छा मौका है | शेर उसे मारकर खा गया |

किसी ने सच ही कहा है कि लालच बुरी बात है | लालची व्यक्ति लालच के कारण अपने प्राण भी गवाँ देता है | इसलिए हमें कभी भी जीवन में लालच नहीं करना चाहिए |

30 मार्च 2013

चतुर कौआ और साँप

एक नदी के किनारे बरगद का एक वृक्ष था| उस वृक्ष पर घोंसला बनाकर एक कौआ रहता था| वृक्ष की कोटर में एक सर्प रहता था| जब भी मादा कौआ अन्डे देती थी , वह सर्प उन्हें खा जाता था| कौआ बड़ा दुखी था| वह सर्प की दुष्टता के लिए उसे दण्ड देना चाहता था| वह सोचता रहता था कि उस काले भयंकर सर्प से कैसे छुटकारा पाया जाये|

नदी के तट पर एक सुन्दर घाट बना हुआ था| जहाँ पूर्णिमा के दिन राजकुमारी नदी में स्नान करने आती थी| एक दिन कौआ बरगद के पेड़ पर दुखी मन से बैठा हुआ था| उसी समय उसने देखा कि राजकुमारी अपनी सहेलियों के साथ नदी में स्नान करने आ रही हैं| 

घाट पहुँच कर उन्होंने अपने वस्त्र आदि सामान रख दिए| राजकुमारी ने अपना मोतियों का हार भी उतार कर वहीँ रख दिया और अपनी सखियों के साथ नदी में स्नान करने लगी| कौआ को तुरन्त एक तरकीब सूझी| वह बरगद की डाली से काव-काव करता हुआ उड़ा| और राजकुमारी के मोतियों के हार को चोंच से पकड़ कर पेड़ की उस कोटर में डाल दिया जहाँ काला सर्प रहता था| राजकुमारी की एक सहेली ने यह सब देख लिया | शीघ्र ही स्नान करने के बाद राजकुमारी और उनकी सखियाँ हार लेने के लिए बरगद के वृक्ष के पास पहुँची| परन्तु वृक्ष के कोटर में काले भयंकर साँप को देखकर डर गयीं| राजकुमारी ने निश्चय किया कि वह महल पहुँच कर सैनिकों को भेज देंगी और वे सर्प को मारकर कोटर से मोतियों का हार निकाल लेंगे| ठीक ऐसा ही हुआ सैनिकों से कोटर से हार निकालने के लिए सर्प को मार दिया और राजकुमारी को हार सौप दिया|

इस प्रकार कौवे ने अपनी चतुरता से अपने शत्रु से बदला ले लिया और बिना किसी भय की प्रसन्नतापूर्वक रहने लगे|

23 फ़रवरी 2013

बिना विचारे जो करे सो पाछे पछताय ..

एक बार की बात है किसी गाँव में एक ब्राह्मण रहता था वह हर रोज भिक्षा माँगने निकल जाता था| एक दिन वह भिक्षा माँगने के लिए घर से बाहर निकला तो देखता है कि एक नेवली अपने बच्चे को जन्म दे कर मर गई, और नेवली के बच्चा वहाँ काँप रहा था| ब्राह्मण को दया आ गई और उसे अपने घर उठा ले गया| ब्राह्मण की पत्नी यह देख कर उसपे भड़क गई की यह नेवला मेरे बच्चे को नुकसान न पहुँचा दे| लेकिन फिर भी वह अपने बच्चे के साथ नेवले को भी पालन पोषण की, दोनों बड़े हुए और साथ साथ खेलने कूदने लगे|

एक बार ब्राह्मण का बच्चा सो रहा था ब्राह्मण की पत्नी ब्राह्मण से बोल के गई की मै पानी ले ने जा रही हूँ बच्चे को देखते रहना कुछ दूर जाने के बाद ब्राह्मण भी उठा और भिक्षा माँगने के लिए चल दिया तभी बच्चे के पास एक साँप आकर खड़ा हो गया यह देख कर नेवले ने साँप से खूब लड़ा और उसे मार डाला और उसके मुँह  में साँप का खून लग गया था और वो यह दिखाने के लिए ब्राह्मण के पत्नी के पास गया पत्नी खून देख कर डर गयी और पानी की मटका नेवले के ऊपर पटक दिया और भाग कर गई तो देखी की बच्चे के पास एक साँप मरा पड़ा हुआ था और इधर नेवला भी मर गया था जिससे वह फुट फुट कर रोने लगी |

सच कहा गया है की बिना सोचे समझे, बिना देखे दिखाए कोई भी काम नहीं करना चाहिए|
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