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13 जनवरी 2015

सबसे बड़ी चीज

एक दिन बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं थे। ऐसे में बीरबल से जलने वाले सभी सभासद बीरबल के खिलाफ बादशाह अकबर के कान भर रहे थे। अक्सर ऐसा ही होता था, जब भी बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं होते थे, तभी दरबारियों को मौका मिल जाता था। आज भी ऐसा ही मौका था।

बादशाह के साले मुल्ला दो प्याजा की शह पाए कुछ सभासदों ने कहा -'जहांपनाह! आप वास्तव में बीरबल को आवश्यकता से अधिक मान देते हैं, हम लोगों से ज्यादा उन्हें चाहते हैं। आपने उन्हें बहुत सिर चढ़ा रखा है।जबकि जो काम वे करते हैं, वह हम भी कर सकते हैं। मगर आप हमें मौका ही नहीं देते।’

बादशाह को बीरबल की बुराई अच्छी नहीं लगती थी, अतः उन्होंने उन चारों की परीक्षा ली- 'देखो, आज बीरबल तो यहां हैं नहीं और मुझे अपने एक सवाल का जवाब चाहिए। यदि तुम लोगों ने मेरे प्रश्न का सही-सही जवाब नहीं दिया तो मैं तुम चारों को फांसी पर चढ़वा दूंगा।' बादशाह की बात सुनकर वे चारों घबरा गए।

12 अप्रैल 2014

अन्धों की संख्या

एक दिन बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा- बीरबल जरा बताओ तो उस दुनिया में किसकी संख्या अधिक है, जो देख सकते हैं या जो अंधे हैं ? 

बीरबल बोले, इस समय तुरंत तो आपके इस सवाल का जबाब देना मेरे लिए संभव नहीं है लेकिन मेरा विश्वास है की अंधों की संख्या अधिक होगी बजाए देख सकने वालों की। बादशाह ने कहा- तुम्हें अपनी बात सिद्ध करके दिखानी होगी, बीरबल ने भी खुशी-खुशी बादशाह की चुनौती स्वीकार कर ली। 

अगले दिन बीरबल बीच बाजार में एक बिना बुनी हुई चारपाई लेकर बैठ गए और उसे बुनना शुरू कर दिया, उसके अगल-बगल दो आदमी कागज-कलम लेकर बैठे हुए थे। थोडी ही देर मे वहाँ भीड़ इकट्‍ठी हो गई, यह देखने के लिए कि यहाँ हो क्या रहा है। वहां मौजूद हर व्यक्ति ने बीरबल से एक ही सवाल पूछा- बीरबल तुम क्या कर रहे हो?

7 जून 2013

बीरबल के पिताजी

एक दिन बादशाह ने बीरबल को बुलाया और कहने लगे कि बीरबल तुम इतने होशियार हो तो तुम्हारे वालिद तो तुमसे भी ज्यादा अक्लमंद होंगे | मैं उनसे मिलना चाहता हूँ| बीरबल ने कहा कि सरकार वह देहात के रहने वाले सीधे साधे हैं | किंतु बादशाह ने कहा कि मेरी बड़ी इच्छा है कि उनके दर्शन करूँ| बीरबल ने बादशाह का मतलब समझ लिया और बोला कि अच्छी बात है | कुछ दिनों बाद उसने समाचार भेजकर अपने पिता को बुलाया | उनके लिये बहुत ही सुन्दर पोशाक बनवाया और समझाया कि पिता जी - बादशाह आपसे मिलना चाहता है | आप जब दरबार में जाइयेगा तो बादशाह को सलाम करके बैठ जाइयेगा | बादशाह आपसे कुछ भी पूछे – कोई उत्तर न दीजिएगा |

एक दिन बीरबल के पिता जी खूब सज धज कर दरबार में पहुँचे| बादशाह को खबर की गई कि बीरबल के पिता जी आये हैं | बादशाह थोड़ी देर में आया | उसे देखकर बीरबल के पिता जी ने सलाम किया और बैठ गए | बादशाह ने पूछा कि आप बीरबल के पिता हैं | पिताजी चुप थे | उसने फिर पूछा कि आप का नाम क्या है | वे अब भी चुप रहे और कुछ नहीं बोले | आगे बादशाह ने पूछा कि गाँव की खेती इस साल कैसी है ? पिता जी चुप रहे |

बादशाह ने दर्जनों सवाल किये किन्तु बीरबल के पिता ने जबान तक नहीं हिलाई | बादशाह खीज उठा और यह कहते हुए अन्दर चला गया कि किस मुर्ख से आज पाला पड़ा |

बादशाह के जाने के बाद बीरबल के पिता जी भी उठकर घर चले आये और उन्होंने बीरबल से सारी बातें बता दी | बीरबल ने कहा कि ठीक है | चार दिन बाद बीरबल दरबार पहुंचे तो अकबर बादशाह ने कहा अरे बीरबल सुनो तुमसे एक जरुरी बात करनी है | बीरबल करीब आये तो बादशाह ने कहा कि बीरबल - “यदि मूर्खों से पाला पड़ जाय तो क्या करना चाहिए”

इस पर बीरबल तपाक से बोल पड़ा कि ‘हुजूर, सरकार चुप रहना चाहिए’|

यह सुनकर बादशाह की आँखें नीची हो गयी|

6 मई 2013

बुद्धि का फल

एक रोज की बात है कि बादशाह अकबर के दरबार में लंका के राजा का एक दूत पहुँचा | उसने बादशाह अकबर से एक नयी तरह की माँग करते हुए कहा –“ आलमपनाह ! आपके दरबार में एक से बढ़कर एक बुद्धिमान , होशियार तथा बहादुर दरबारी मौजूद हैं | हमारे महाराज ने आपके पास मुझे एक घड़ा भरकर बुद्धि लाने के लिए भेजा है | हमारे महाराज को आप पर पूरा भरोसा है कि आप उसका बन्दोबस्त किसी-न-किसी तरह और जल्दी ही कर देंगे |”

यह सुनकर बादशाह अकबर चकरा गए |

उन्होंने अपने मन में सोंचा – “ क्या बेतुकी माँग है , भला घड़े भर बुद्धि का बन्दोबस्त कैसे किया जा सकता है ? लगता है | लंका का राजा हमारा मजाक बनाना चाहता है , कहीं वह इसमें सफल हो गया तो ...?

तभी बादशाह को बीरबल का ध्यान आया , वे सोचने लगे कि शायद यह कार्य बीरबल के वश का भी न हो, मगर उसे बताने में बुराई ही क्या है ?

जब बीरबल को बादशाह के बुलवाने का कारण ज्ञात हुआ तो वह मुस्कराते हुए कहने लगे – “ आलमपनाह ! चिन्ता की कोई बात नहीं , बुद्धि की व्यवस्था हो जाएगी , लेकिन इसमें कुछ हफ्ते का वक़्त लग सकता है |” 
बादशाह अकबर बीरबल की इस बात पर कहते भी तो क्या , बीरबल को मुँह माँगा समय दे दिया गया |

6 दिसंबर 2012

आदमी एक रूप तीन


एक बार बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा- ‘‘क्या तुम हमें तीन तरह की खूबियाँ एक ही आदमी में दिखा सकते हो?''
‘‘जी हुजूर, पहली तोते की, दूसरी शेर की, तीसरी गधे की। परन्तु आज नहीं, कल। '' बीरबल ने कहा।
‘‘ठीक है, तुम्हें कल का समय दिया जाता है। '' बादशाह ने इजाजत देते हुए कहा।

अगले दिन बीरबल एक व्यक्ति को पालकी में डालकर लाया और उसे पालकी से बाहर निकाला। फिर उस आदमी को शराब का एक पैग दिया। शराब पीकर वह आदमी डरकर बादशाह से विनती करने लगा- ‘‘हुजूर! मुझे माफ कर दो। मैं एक बहुत गरीब आदमी हूं। ''
बीरबल ने बादशाह को बताया- ‘‘यह तोते की बोली है। '' 

कुछ देर बाद उस आदमी को एक पैग और दिया तो वह नशे में बादशाह से बोला- '' अरे जाओ, तुम दिल्ली के बादशाह हो तो क्या, हम भी अपने घर के बादशाह हैं। हमें ज्यादा नखरे मत दिखाओ। ''
बीरबल ने बताया- ‘‘यह शेर की बोली है। '' कुछ देर बाद उस आदमी को एक पैग और दिया तो वह नशे में एक तरफ गिर गया और नशे में ऊटपटांग बड़बड़ाने लगा। 

बीरबल ने उसे एक लात लगाते हुए बादशाह से कहा- ‘‘हुजूर! यह गधे की बोली है। ''
बादशाह बहुत खुश हुए। उन्होंने बीरबल को बहुत-सा इनाम दिया।

25 नवंबर 2012

सारा जग बेईमान !

एक बार बादशाह अकबर ने बीरबल से शान से कहा -" बीरबल हमारी जनता बेहद ईमानदार है और हमें बहुत प्यार करती है |" बीरबल ने तुरन्त उत्तर दिया - " बादशाह सलामत न तो आपके राज्य में कोई भी पूरी तरह से ईमानदार है और न ही वो आपसे ज्यादा प्यार करतें हैं |"

"यह तुम क्या कह रहे हो बीरबल ? अकबर बोले |
बीरबल  - "बादशाह सलामत ! मैं अपनी बात को साबित कर सकता हूँ |"
"ठीक है तुम हमें साबित करके दिखाओ |" बादशाह अकबर बोले |

बीरबल ने नगर में ढिंढोरा पिटवा दिया कि बादशाह सलामत एक भोज करने जा रहें हैं | उसके लिए सारी प्रजा से अनुरोध है कि कल सुबह से पहले  एक -एक लोटा दूध डालें , कड़ाहे रखवा दिये गये हैं | हर आदमी ने यही सोचा कि जहाँ इतना दूध इकट्ठा होगा वहाँ एक लोटा पानी का क्या पता चलेगा | अत : हर आदमी कड़ाहो में पानी डाल गया |

सुबह अकबर ने जब उन कड़ाहो को देखा जिसमे जनता से दूध डालने को कहा गया था  तो दंग रह गये उन कड़ाहो में केवल पानी था | और उन्हें वास्तविक स्थिति का पता चल गया |

10 नवंबर 2012

चोर की दाढ़ी में तिनका


बादशाह अकबर बीरबल से अकसर अजीब सवाल तो पूछते ही थे लेकिन एक दिन उन्होंने बीरबल को छकाने की एक तरकीब खोज निकाली। उन्होंने अपनी बेशकीमती अंगूठी छिपाकर एक सरदार को दे दी और उससे बात छुपाकर रखने के लिए कहा। जब बीरबल उनके पास आए तो बादशाह ने कहा-''आज हमारी अंगूठी खो गई है। सुबह तो वह हमारे पास ही थी। शौच जाते वक्त मेंने उतार कर रखदी और जब वापस लौटा तो देखा कि अंगूठी गायब है। बीरबल चुपचाप सुनते रहे।

बादशाह ने आगे कहा-'' मुझे यकीन है कि यह काम महल के ही किसी व्यक्ति का ही है। बाहरी आदमी ऐसी हिम्मत नहीं कर सकता। बीरबल! तुम ज्योतिष शास्त्र बखूबी जानते हो अतः चोर का पता लगाओ।'' बीरबल ने उस जगह का पता पूछा, जहाँ उन्होंने शौच जाने से पहले अंगूठी रखी थी। 

बादशाह अकबर ने एक अलमारी की ओर इशारा किया। बीरबल ने उस अलमारी के पास जाकर उससे कान लगाकर कुछ देर बाद हटा लेने का नाटक किया। देखने से यह लगता था, जैसे वह कोई बात सुनने की कोशिश कर रहा है।''

कुछ देर बाद बीरबल ने बादशाह की तरफ देखकर कहा-''अलमारी साफ बताती है कि जिसके पास अंगूठी है, उसकी दाढी में तिनका है।'' बीरबल की बात को जब पास ही बैठे सरदार ने सुना, जिसको बादशाह ने अंगूठी दी थी, तो यह घबराकर अपना मुंह और दाढ़ी टटोलने लगा। बीरबल पहले से ही चौकन्ने थे। सरदार की हरकत उनसे छिपी नहीं रह सकी। फौरन ही बीरबल ने उस सरदार को पकडकर बादशाह के सामने पेश किया और कहा ''जहाँपनाह , आपकी अंगूठी का चोर यही है,'' यह बात बादशाह पहले से ही जानते थे। वह बीरबल की इस चतुराई से बेहद खुश हुए |

1 मार्च 2012

बीरबल की खिचड़ी


एक दफा शहंशाह अकबर ने घोषणा की कि यदि कोई व्यक्ति सर्दी के मौसम में नर्मदा नदी के ठंडे पानी में घुटनों तक डूबा रह कर सारी रात गुजार देगा उसे भारी भरकम तोहफ़े से पुरस्कृत किया जाएगा|

एक गरीब धोबी ने अपनी गरीबी दूर करने की खातिर हिम्मत की और सारी रात नदी में घुटने पानी में ठिठुरते बिताई और जहाँपनाह से अपना ईनाम लेने पहुँचा| बादशाह अकबर ने उससे पूछा तुमने कैसे सारी रात बिना सोए, खड़े खड़े नदी में रात बितायी ? तुम्हारे पास क्या सबूत है?

धोबी ने उत्तर दिया – जहाँपनाह, मैं सारी रात नदी छोर के महल के कमरे में जल रहे दीपक को देखता रहा और इस तरह जागते हुए सारी रात नदी के शीतल जल में गुजारी| तो इसका मतलब यह हुआ कि तुम महल के दिये की गरमी लेकर सारी रात पानी में खड़े रहे और ईनाम चाहते हो | बादशाह ने क्रोधित होकर कहा- सिपाहियों इसे जेल में बंद कर दो|

बीरबल भी दरबार में  था उसे यह देखकर बुरा लगा कि बादशाह नाहक ही उस गरीब पर जुल्म कर रहे हैं| बीरबल दूसरे दिन दरबार में हाज़िर नहीं हुआ, जबकि उस दिन दरबार की एक आवश्यक बैठक थी| बादशाह ने एक खादिम को बीरबल को बुलाने भेजा| खादिम ने लौट कर जवाब दिया – बीरबल खिचड़ी पका रहे हैं और वह खिचड़ी पकते ही उसे खाकर आएँगे|

जब बीरबल बहुत देर बाद भी नहीं आये तो बादशाह को बीरबल की चाल में कुछ संदेह नज़र आया| वे खुद तफ्तीश करने पहुचे और उन्होंने देखा कि एक बहुत लंबे से डंडे पर एक घड़ा बांधकर उसे बहुत ऊँचा लटकाया गया है और नीचे जरा से आग जल रही है| पास में बीरबल खटिया पर आराम से लेटे हुए हैं|

बादशाह ने तमककर पूछा – यह क्या तमाशा है? क्या ऐसी भी खिचड़ी पकती है? बीरबल ने कहा माफ़ करें जहाँपनाह, जरुर पकेगी जैसे कि धोबी को महल के दिये से गर्मी मिली थी| बादशाह को बात समझ में आ गयी और उन्होंने बीरबल को गले लगाया और धोबी को मुक्त कर इनाम देने का हुक्म दिया|

9 फ़रवरी 2012

ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो

ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो,
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी।
मग़र मुझको लौटा दो बचपन का सावन,
वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी।

मोहल्ले की सबसे निशानी पुरानी,
वो बुढ़िया जिसे बच्चे कहते थे नानी,
वो नानी की बातों में परियों का डेरा,
वो चेहरे की झुर्रियों में सदियों का फेरा,
भुलाए नहीं भूल सकता है कोई,
वो छोटी-सी रातें वो लम्बी कहानी।

कड़ी धूप में अपने घर से निकलना
वो चिड़िया, वो बुलबुल, वो तितली पकड़ना,
वो गुड़िया की शादी पे लड़ना-झगड़ना,
वो झूलों से गिरना, वो गिर के सँभलना,
वो पीपल के पल्लों के प्यारे-से तोहफ़े,
वो टूटी हुई चूड़ियों की निशानी।

कभी रेत के ऊँचे टीलों पे जाना
घरौंदे बनाना, बना के मिटाना,
वो मासूम चाहत की तस्वीर अपनी,
वो ख़्वाबों खिलौनों की जागीर अपनी,
न दुनिया का ग़म था, न रिश्तों का बंधन,
बड़ी खूबसूरत थी वो ज़िन्दगानी।


गायक : ‘जगजीत सिंह 'और' चित्रा '


28 नवंबर 2011

लहरें गिनना


एक दिन अकबर बादशाह के दरबार में एक व्यक्ति नौकरी मांगने के लिए अर्जी लेकर आया। उससे कुछ देर बातचीत करने के बाद बादशाह ने उसे चुंगी अधिकारी बना दिया। बीरबल, जो पास ही बैठा था, यह सब देख रहा था। उस आदमी के जाने के बाद वह बोला- ‘‘यह आदमी जरूरत से ज्यादा चालाक जान पड़ता है। बेईमानी किये बिना नहीं रहेगा। ''

थोड़े ही समय के बाद अकबर बादशाह के पास उस आदमी की शिकायतें आने लगीं कि वह प्रजा को काफी परेशान करता है तथा रिश्वत लेता है। अकबर बादशाह ने उस आदमी का तबादला एक ऐसी जगह करने की सोची, जहाँ उसे किसी भी प्रकार की बेईमानी का मौका न मिले। उन्होंने उसे घुड़साल का मुंशी मुकर्रर कर दिया। उसका काम था घोड़ों की लीद उठवाना।

मुंशीजी ने वहां भी रिश्वत लेना आरम्भ कर दिया। मुंशीजी साईसों से कहने लगे कि तुम घोड़ों को दाना कम खिलाते हो, इसलिए मुझे लीद तौलने के लिए भेजा गया है। यदि तुम्हारी लीद तौल में कम बैठी तो अकबर बादशाह से शिकायत कर दूंगा। इस प्रकार मुंशीजी प्रत्येक घोड़े के हिसाब से एक रुपया लेने लगे।

अकबर बादशाह को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने मुंशीजी को यमुना की लहरें गिनने का काम दे दिया। वहाँ कोई रिश्वत व बेईमानी का मौका ही नहीं था। लेकिन मुंशी जी ने वहां भी अपनी अक्ल के घोड़े दौड़ा दिये। उन्होंने नावों को रोकना आरम्भ कर दिया| और बोले कि नाव रोको, हम लहरें गिन रहे हैं। अत: नावों को दो-तीन दिन तक रुकना पड़ता था या फिर दस रुपये देने पर ही जाने देते थे|

अकबर बादशाह को जब इस बात का पता लगा तो उन्होंने लिखकर आज्ञा दी- ‘‘नावों को रोको मत, जाने दो?'' उस मुंशी ने उस लिखित में थोड़ा सुधार कर टंगवा दिया – नावों को रोको, मत जाने दो और वसूली करने लगे |

अंततः बादशाह को उस मुंशी को सार्वजनिक सेवा से बाहर करना ही पड़ा|

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