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14 फ़रवरी 2012

थाल सजाकर किसे पूजने (जौहर)


थाल सजाकर किसे पूजने चले प्रात ही मतवाले,
कहा चले तुम राम नाम का पीताम्बर तन पर डाले|

इधर प्रयाग न गंगा सागर इधर न रामेश्वर काशी,
इधर कहा है तीर्थ तुम्हारा कहा चले तुम सन्यासी|

चले झूमते मस्ती से क्या तुम अपना पथ आये भूल,
कहा तुम्हारा दीप जलेगा कहा चढ़ेगा माला फूल|

मुझे न जाना गंगा सागर मुझे न रामेश्वर काशी,
तीर्थराज चित्तौड़ देखने को मेरी आँखे प्यासी|

अपने अटल स्वतंत्र दुर्ग पर सुनकर वैरी की बोली,
निकल पड़ी लेकर तलवारें जहाँ जवानों की टोली|

जहाँ आन पर माँ बहनों ने जल-जला पवन होली,
वीर मंडली गर्वित स्वर में जय माँ की जय-जय बोली|

सुन्दरियों ने जहाँ देश हित जौहर व्रत करना सीखा,
स्वतंत्रता के लिए जहाँ पर बच्चों ने भी मरना सीखा|

वही जा रहा पूजा करने लेने सतियों की पद धूल,
वही हमारा दीप जलेगा वही चढेगा माला फूल|

जहाँ पदमिनी जौहर व्रत करती चढ़ी चिता की ज्वाला पर,
क्षण भर वही समाधी लगी बैठ इसी मृग छाला पर|

श्यामनारायण पाण्डेय द्वारा रचित


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