एक ओल्ड ऐज होम, वहाँ एक कमरे के बाहर, एक आदमी और एक लेडी डॉ, " देखिये मैंने आपकी माँ का चेकअप कर लिया है.... वो अब कुछ दिनों की ही मेहमान हैं.. मै कुछ मेडिसन लिख रही हूँ.. इनसे उन्हें कम तकलीफ होगी... और हाँ मेरी फीस है 1200 रूपए " डॉ ने उस आदमी से कहा, डॉ की बात सुनकर वो चौंकते हुए बोला " 1200 रूपए... फीस ??? " " जी हां... मै अपना क्लीनिक छोड़ कर यहाँ आई हूँ " डॉ ने बुरा सा मुँह बना कर कहा, उस आदमी ने अनमने मन से डॉ को फीस दी और फिर सामने के कमरे मे चला गया, वो एक छोटा सा कमरा था, सामने एक बेड पर एक बूढी महिला लेटी थीं, बेड के बराबर मे स्टूल पर एक टेबल फैन रखा था जो उन बूढी महिला की तरह ही बूढा लग रहा था, उसकी हवा फेंकने की रफ़्तार से लग रहा था जैसे वो भी अपने अंतिम समय का इंतज़ार कर रहा हो|
Pages
28 अगस्त 2017
8 जून 2016
धन, सफलता और प्रेम
एक औरत ने तीन संतों को अपने घर के सामने देखा। वह उन्हें जानती नहीं थी। औरत ने कहा – “कृपया भीतर आइये और भोजन करिए।” संत बोले – “क्या तुम्हारे पति घर पर हैं?” औरत – “नहीं, वे अभी बाहर गए हैं।” संत –“हम तभी भीतर आयेंगे जब वह घर पर हों।” शाम को उस औरत का पति घर आया और औरत ने उसे यह सब बताया।
पति – “जाओ और उनसे कहो कि मैं घर आ गया हूँ और उनको आदर सहित बुलाओ।” औरत बाहर गई और उनको भीतर आने के लिए कहा। संत बोले – “हम सब किसी भी घर में एक साथ नहीं जाते।” “पर क्यों?” – औरत ने पूछा। उनमें से एक संत ने कहा – “मेरा नाम धन है |”
फ़िर दूसरे संतों की ओर इशारा कर के कहा – “इन दोनों के नाम सफलता और प्रेम हैं। हममें से कोई एक ही भीतर आ सकता है। आप घर के अन्य सदस्यों से मिलकर तय कर लें कि भीतर किसे निमंत्रित करना है।”
25 अप्रैल 2016
परिश्रम और भाग्य की चाबी
एक पान वाला था। जब भी पान खाने जाओ ऐसा लगता कि वह हमारा ही रास्ता देख रहा हो। हर विषय पर बात करने में उसे बड़ा मज़ा आता। कई बार उसे कहा की भाई देर हो जाती है जल्दी पान लगा दिया करो पर उसकी बात ख़त्म ही नही होती। एक दिन अचानक कर्म और भाग्य पर बात शुरू हो गई। तक़दीर और तदबीर की बात सुन मैनें सोचा कि चलो आज उसकी फ़िलासफ़ी देख ही लेते हैं। मैंने एक सवाल उछाल दिया।
मेरा सवाल था कि आदमी मेहनत से आगे बढ़ता है या भाग्य से? और उसके जवाब से मेरे दिमाग़ के सारे जाले ही साफ़ हो गए। कहने लगा,आपका किसी बैंक में लाकर तो होगा? उसकी चाभियाँ ही इस सवाल का जवाब है। हर लाकर की दो चाभियाँ होती हैं। एक आप के पास होती है और एक मैनेजर के पास। आप के पास जो चाभी है वह है परिश्रम और मैनेजर के पास वाली भाग्य। जब तक दोनों नहीं लगतीं ताला नही खुल सकता। आप कर्मयोगी पुरुष हैं ओर मैनेजर भगवान।
19 अप्रैल 2016
माँ तो बस माँ होती है
आधी रात को बहुत बारिश हो रही थी। अजय और उसकी बीवी प्रिया एक मित्र की पार्टी से अपनी गाडी से घर वापस लौट रहे थे.. बारिश की वजह से अजय बहुत धीमी गति से गाड़ी चला रहा था, तभी अचानक बिजली गिरी.. बिजली की रोशनी में अजय को गाड़ी के सामने एक बदहवास सी एक औरत दिखाई दी.. अजय ने गाड़ी रोक दी..! गाड़ी रुकने पर उसकी बीवी ने कहा :- क्या हूआ..? गाड़ी क्यों रोक दी..?
अजय ने आगे की ओर इशारा किया। प्रिया ने आगे देखा तो वो डर गयी, क्यों कि गाड़ी के सामने एक औरत खड़ी थी। वो औरत गाड़ी के पास आयी, और हाथ से गाड़ी का शीशा नीचे करने का इशारा करने लगी। अजय की बीवी प्रिया काफी डर गयी थी, उसने अजय को गाडी चलाने को कहा, लेकिन गाड़ी भी स्टार्ट नही हुईं। गाड़ी के बाहर खडी औरत बारिश की वजह से भींग गयी थी। वो हाथ जोडकर गाड़ी का शीशा नीचे करने का इशारा कर रही थी।
18 अप्रैल 2016
जैसा खाओ अन्न वैसा होवे मन
बासमती चावल बेचने वाले एक सेठ की स्टेशन मास्टर से साँठ-गाँठ हो गयी। सेठ को आधी कीमत पर बासमती चावल मिलने लगा।
सेठ ने सोचा कि इतना पाप हो रहा है , तो कुछ धर्म-कर्म भी करना चाहिए। एक दिन उसने बासमती चावल की खीर बनवायी और किसी साधु बाबा को आमंत्रित कर भोजनप्रसाद लेने के लिए प्रार्थना की ।
साधु बाबा ने बासमती चावल की खीर खायी। दोपहर का समय था। सेठ ने कहाः "महाराज ! अभी आराम कीजिए। थोड़ी धूप कम हो जाय फिर पधारियेगा। साधु बाबा ने बात स्वीकार कर ली।
सेठ ने 100-100 रूपये वाली 10 लाख जितनी रकम की गड्डियाँ उसी कमरे में चादर से ढँककर रख दी। साधु बाबा आराम करने लगे। खीर थोड़ी हजम हुई। साधु बाबा के मन में हुआ कि इतनी सारी गड्डियाँ पड़ी हैं, एक-दो उठाकर झोले में रख लूँ तो किसको पता चलेगा ? साधु बाबा ने एक गड्डी उठाकर रख ली।
18 मार्च 2016
खूबसूरत सेक्रेटरी - जोक
बॉस ने एक चुलबुली, निहायत ही खूबसूरत सेक्रेटरी को काम पर रखा।
.
लेकिन 10 दिन बाद ही 27वें माले से कूद कर बॉस ने आत्महत्या कर ली ।
.
इंस्पेक्टर :-"कमरे में उस वक़्त कौन मौज़ूद था ?
सेक्रेटरी:- "जी,...मैं थी।
.
इंस्पेक्टर :- "आख़िर हुआ क्या? उसने ख़ुदकुशी क्यूँ की?
सेक्रेटरी:- "वह बहुत अच्छे इंसान थे। एक दिन उन्होंने मुझे 2 लाख रुपये का ड्रेस उपहार में दिया ..
.
फिर एक दिन उन्होंने मुझे 15 लाख की कीमत वाला हीरों का हार खरीद कर दिया।
.
परसों ही वह मेरे लिए 5 लाख की हीरे की अंगूठी ले कर आए थे।
.
यह रही मेरी उंगली में।
.
इंस्पेक्टर :- "फिर।
सेक्रेटरी:- "आज उन्होनें मुझे शादी के लिए प्रपोज किया।
.
लेकिन 10 दिन बाद ही 27वें माले से कूद कर बॉस ने आत्महत्या कर ली ।
.
इंस्पेक्टर :-"कमरे में उस वक़्त कौन मौज़ूद था ?
सेक्रेटरी:- "जी,...मैं थी।
.
इंस्पेक्टर :- "आख़िर हुआ क्या? उसने ख़ुदकुशी क्यूँ की?
सेक्रेटरी:- "वह बहुत अच्छे इंसान थे। एक दिन उन्होंने मुझे 2 लाख रुपये का ड्रेस उपहार में दिया ..
.
फिर एक दिन उन्होंने मुझे 15 लाख की कीमत वाला हीरों का हार खरीद कर दिया।
.
परसों ही वह मेरे लिए 5 लाख की हीरे की अंगूठी ले कर आए थे।
.
यह रही मेरी उंगली में।
.
इंस्पेक्टर :- "फिर।
सेक्रेटरी:- "आज उन्होनें मुझे शादी के लिए प्रपोज किया।
16 मार्च 2016
संगठन की महत्ता
आज एक नई सीख़ मिली जब अँगूर खरीदने बाजार गया ।
पूछा "क्या भाव है?
बोला : "80 रूपये किलो ।"
पास ही कुछ अलग-अलग टूटे हुए अंगूरों के दाने पडे थे ।
मैंने पूछा : "क्या भाव है इनका ?"
वो बोला : "30 रूपये किलो"
मैंने पूछा : "इतना कम दाम क्यों..?
वो बोला : "साहब, हैं तो ये भी बहुत बढ़िया..!!
लेकिन .....अपने गुच्छे से टूट गए हैं ।"
पूछा "क्या भाव है?
बोला : "80 रूपये किलो ।"
पास ही कुछ अलग-अलग टूटे हुए अंगूरों के दाने पडे थे ।
मैंने पूछा : "क्या भाव है इनका ?"
वो बोला : "30 रूपये किलो"
मैंने पूछा : "इतना कम दाम क्यों..?
वो बोला : "साहब, हैं तो ये भी बहुत बढ़िया..!!
लेकिन .....अपने गुच्छे से टूट गए हैं ।"
29 नवंबर 2015
समर्पण
एक बार किसी देश का राजा अपनी प्रजा का हाल-चाल पूछने के लिए गावो में घूम रहा था | घूमते-घूमते उसके कुर्ते का बटन टूट गया उसने अपने मंत्री को कहा कि पता करो की इस गांव में कौन सा दर्जी हैं जो मेरे बटन को सिल सके |
मंत्री ने पता किया उस गांव में सिर्फ एक ही दर्जी था जो कपडे सिलने का काम करता था| उसको राजा के समाने ले जाया गया राजा ने कहा की तुम मेरे कुर्ते का बटन सी सकते हो | दर्जी ने कहा यह कोई मुश्किल काम थोड़े ही है उसने मत्री से बटन ले लिया, धागे से उसने राजा के कुर्ते का बटन फौरन सीं दिया |
मंत्री ने पता किया उस गांव में सिर्फ एक ही दर्जी था जो कपडे सिलने का काम करता था| उसको राजा के समाने ले जाया गया राजा ने कहा की तुम मेरे कुर्ते का बटन सी सकते हो | दर्जी ने कहा यह कोई मुश्किल काम थोड़े ही है उसने मत्री से बटन ले लिया, धागे से उसने राजा के कुर्ते का बटन फौरन सीं दिया |
10 अप्रैल 2015
ईश्वर का कार्य
एक बार श्री कृष्ण और अर्जुन भ्रमण पर निकले | तो उन्होंने मार्ग में एक निर्धन ब्राहमण को भिक्षा मागते देखा |अर्जुन को उस पर दया आ गयी और उन्होंने उस ब्राहमण को स्वर्ण मुद्राओ से भरी एक पोटली दे दी। जिसे पाकर ब्राहमण प्रसन्नता पूर्वक अपने सुखद भविष्य के सुन्दर स्वप्न देखता हुआ घर लौट चला | किन्तु उसका दुर्भाग्य उसके साथ चल रहा था, राह में एक लुटेरे ने उससे वो पोटली छीन ली। ब्राहमण दुखी होकर फिर से भिक्षावृत्ति में लग गया।
अगले दिन फिर अर्जुन की दृष्टि जब उस ब्राहमण पर पड़ी तो उन्होंने उससे इसका कारण पूछा। ब्राहमण ने सारा विवरण अर्जुन को बता दिया, ब्राहमण की व्यथा सुनकर अर्जुन को फिर से उस पर दया आ गयी | अर्जुन ने विचार किया और इस बार उन्होंने ब्राहमण को मूल्यवान एक माणिक दिया। ब्राहमण उसे लेकर घर पंहुचा उसके घर में एक पुराण घड़ा था जो बहुत समय से प्रयोग नहीं किया गया था, ब्राह्मण ने चोरी होने के भय से माणिक उस घड़े में छुपा दिया। किन्तु उसका दुर्भाग्य, दिन भर का थका मांदा होने के कारण उसे नींद आ गयी, इस बीच ब्राहमण की स्त्री नदी में जल लेने चली गयी किन्तु मार्ग में ही उसका घड़ा टूट गया, उसने सोंचा, घर में जो पुराना घड़ा पड़ा है उसे ले आती हूँ, ऐसा विचार कर वह घर लौटी और उस पुराने घड़े को ले कर चली गई और जैसे ही उसने घड़े को नदी में डुबोया वह माणिक भी जल की धारा के साथ बह गया।
27 जनवरी 2015
मुझे नौकरी की जरुरत नहीं हैं !
एक छोटा बच्चा एक बड़ी दुकान पर लगे टेलीफोन बूथ पर जाता हैं | और मालिक से छुट्टे पैसे लेकर एक नंबर डायल करता हैं। दुकान का मालिक उस लड़के को ध्यान से देखते हुए उसकी बातचीत पर ध्यान देता हैं -
लड़का – मैडम क्या आप मुझे अपने बगीचे की साफ़ सफाई का काम देंगी ?
औरत – (दूसरी तरफ से) नहीं, मैंने एक दुसरे लड़के को अपने बगीचे का काम देखने के लिए रख लिया हैं।
लड़का – मैडम मैं आपके बगीचे का काम उस लड़के से आधे वेतन में करने को तैयार हूँ |
औरत – मगर जो लड़का मेरे बगीचे का काम कर रहा हैं उससे मैं पूरी तरह संतुष्ट हूँ।
13 जनवरी 2015
सबसे बड़ी चीज
एक दिन बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं थे। ऐसे में बीरबल से जलने वाले सभी सभासद बीरबल के खिलाफ बादशाह अकबर के कान भर रहे थे। अक्सर ऐसा ही होता था, जब भी बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं होते थे, तभी दरबारियों को मौका मिल जाता था। आज भी ऐसा ही मौका था।
बादशाह के साले मुल्ला दो प्याजा की शह पाए कुछ सभासदों ने कहा -'जहांपनाह! आप वास्तव में बीरबल को आवश्यकता से अधिक मान देते हैं, हम लोगों से ज्यादा उन्हें चाहते हैं। आपने उन्हें बहुत सिर चढ़ा रखा है।जबकि जो काम वे करते हैं, वह हम भी कर सकते हैं। मगर आप हमें मौका ही नहीं देते।’
बादशाह को बीरबल की बुराई अच्छी नहीं लगती थी, अतः उन्होंने उन चारों की परीक्षा ली- 'देखो, आज बीरबल तो यहां हैं नहीं और मुझे अपने एक सवाल का जवाब चाहिए। यदि तुम लोगों ने मेरे प्रश्न का सही-सही जवाब नहीं दिया तो मैं तुम चारों को फांसी पर चढ़वा दूंगा।' बादशाह की बात सुनकर वे चारों घबरा गए।
बादशाह के साले मुल्ला दो प्याजा की शह पाए कुछ सभासदों ने कहा -'जहांपनाह! आप वास्तव में बीरबल को आवश्यकता से अधिक मान देते हैं, हम लोगों से ज्यादा उन्हें चाहते हैं। आपने उन्हें बहुत सिर चढ़ा रखा है।जबकि जो काम वे करते हैं, वह हम भी कर सकते हैं। मगर आप हमें मौका ही नहीं देते।’
बादशाह को बीरबल की बुराई अच्छी नहीं लगती थी, अतः उन्होंने उन चारों की परीक्षा ली- 'देखो, आज बीरबल तो यहां हैं नहीं और मुझे अपने एक सवाल का जवाब चाहिए। यदि तुम लोगों ने मेरे प्रश्न का सही-सही जवाब नहीं दिया तो मैं तुम चारों को फांसी पर चढ़वा दूंगा।' बादशाह की बात सुनकर वे चारों घबरा गए।
29 नवंबर 2014
हिसाब बराबर
एक डॉक्टर ने नया-नया क्लीनिक खोला तो बाहर बोर्ड टाँग दिया, जिस पर लिखा था, "किसी भी बीमारी का इलाज़ मात्र 300/- रुपये में और अगर हम आपका इलाज़ नहीं कर पाये तो हम आपको 1000/- रुपये देंगे।"
यह बोर्ड पढ़कर एक दिन एक आदमी के मन में ख्याल आया कि क्यों न कोई चालाकी की जाये और 1000/- रुपये कमाये जाएँ। इसी सोच के साथ आदमी डॉक्टर के पास पहुँच गया।
डॉक्टर: आईये बैठिये, बताइये क्या तक़लीफ है आपको?
आदमी: डॉक्टर साहब, मैं अपना स्वाद खो चुका हूँ। कुछ भी खाता या पीता हूँ तो स्वाद का पता ही नहीं चलता।
25 नवंबर 2014
उबलते पानी और मेंढक की कहानी
ये कहानी है एक "मेंढक और उबलते पानी" की । एक बार एक मेंढक के शरीर में बदलाव करने की क्षमता को जाँचने के लिए कुछ वैज्ञानिकों ने उस मेंढक को एक काँच के जार में डाल दिया और उसमे जार की आधी ऊंचाई तक पानी भर दिया । फिर उस जार को धीरे धीरे गर्म किया जाने लगा, जब गर्मी बर्दाश्त से बाहर हो जाये तब मेंढक उस जार से बाहर कूद सके इसलिए, जार का मुँह ऊपर से खुला रखा गया ।
3 नवंबर 2014
विजेता मेंढक
बहुत समय पहले की बात है एक सरोवर में बहुत सारे मेंढक रहते थे | सरोवर के बीचों-बीच एक बहुत पुराना धातु का खम्भा भी लगा हुआ था | जिसे उस सरोवर को बनवाने वाले राजा ने लगवाया था | खम्भा काफी ऊँचा था और उसकी सतह भी बिलकुल चिकनी थी |
एक दिन मेंढकों के दिमाग में आया कि क्यों ना एक रेस करवाई जाए | रेस में भाग लेने वाली प्रतियोगियों को खम्भे पर चढ़ना होगा, और जो सबसे पहले एक ऊपर पहुच जाएगा वही विजेता माना जाएगा | रेस का दिन आ पहुँचा, चारो तरफ बहुत भीड़ थी, आस-पास के इलाकों से भी कई मेंढक इस रेस में हिस्सा लेने पहुचे | माहौल में सरगर्मी थी, हर तरफ शोर ही शोर था |
रेस शुरू हुई लेकिन खम्भे को देखकर भीड़ में एकत्र हुए किसी भी मेंढक को ये यकीन नहीं हुआ कि कोई भी मेंढक ऊपर तक पहुंच पायेगा …
23 जुलाई 2014
चालाक गधा
एक दिन एक किसान का गधा कुएँ में गिर गया। वह गधा घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं। अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि गधा काफी बूढा हो चूका था, अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिए |
किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया। सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। जैसे ही गधे कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है, वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा । और फिर, अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया। सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे। तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया। अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह गधा एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था। वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था।
12 अप्रैल 2014
अन्धों की संख्या
एक दिन बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा- बीरबल जरा बताओ तो उस दुनिया में किसकी संख्या अधिक है, जो देख सकते हैं या जो अंधे हैं ?
बीरबल बोले, इस समय तुरंत तो आपके इस सवाल का जबाब देना मेरे लिए संभव नहीं है लेकिन मेरा विश्वास है की अंधों की संख्या अधिक होगी बजाए देख सकने वालों की। बादशाह ने कहा- तुम्हें अपनी बात सिद्ध करके दिखानी होगी, बीरबल ने भी खुशी-खुशी बादशाह की चुनौती स्वीकार कर ली।
अगले दिन बीरबल बीच बाजार में एक बिना बुनी हुई चारपाई लेकर बैठ गए और उसे बुनना शुरू कर दिया, उसके अगल-बगल दो आदमी कागज-कलम लेकर बैठे हुए थे। थोडी ही देर मे वहाँ भीड़ इकट्ठी हो गई, यह देखने के लिए कि यहाँ हो क्या रहा है। वहां मौजूद हर व्यक्ति ने बीरबल से एक ही सवाल पूछा- बीरबल तुम क्या कर रहे हो?
28 जनवरी 2014
राजनीति पर एक सटीक व्यंग्य - जिसके हम मामा हैं
एक सज्जन वाराणसी पहुँचे | स्टेशन पर उतरे ही थे कि एक लड़का दौड़ता हुआ आया |
“मामा जी! मामा जी!”—लड़के ने लपक कर पैर छूए |
वे पहचाने नहीं , बोले –‘तुम कौन?’
‘मैं मुन्ना | आप पहचाने नहीं मुझे ?’
‘मुन्ना?’ वे सोचने लगे |
’हाँ, मुन्ना | भूल गए आप मामा जी | खैर कोई बात नहीं इतने साल भी तो हो गए |’
‘तुम यहाँ कैसे ?’ ‘मैं आजकल यही हूँ |’
‘अच्छा!’ ‘हाँ’
मामा जी अपने भांजे के साथ वाराणसी घूमने लगे | चलो कोई तो साथ मिला | कभी इस मन्दिर , कभी उस मन्दिर , फिर पहुँचे गंगा घाट | सोचा नहा लें |
‘मुन्ना नहा लें ?’
‘जरुर नहाइये मामा जी | वाराणसी आये हैं और नहायें नहीं, यह कैसे हो सकता है |’
मामा जी ने गंगा में डुबकी लगायी | हर-हर गंगे | बाहर निकले तो सामान गायब , कपड़े गायब , लड़का भी गायब |
‘मुन्ना .......ए मुन्ना |’
मगर मुन्ना वहाँ हो तो मिले | तौलिया लपेट कर खड़ें हैं |
‘क्यों भाई, आपने साहब मुन्ना को देखा है?’
‘कौन मुन्ना ?’
‘वही जिसके हम मामा हैं |’
‘मै समझा नहीं |’
‘अरे जिसके हम मामा हैं वो मुन्ना |’
वे तौलिया पेटे यहाँ से वहाँ दौड़ते रहे | मुन्ना नहीं मिला |
9 जनवरी 2014
जूता कैसे आया ?
एक बार की बात है एक राजा था। उसका एक बड़ा-सा राज्य था। एक दिन उसे देश घूमने का विचार आया और उसने देश भ्रमण की योजना बनाई और घूमने निकल पड़ा। जब वह यात्रा से लौट कर अपने महल आया। उसने अपने मंत्रियों से पैरों में दर्द होने की शिकायत की। राजा का कहना था कि मार्ग में जो कंकड़ पत्थर थे वे मेरे पैरों में चुभ गए और इसके लिए कुछ इंतजाम करना चाहिए।
कुछ देर विचार करने के बाद उसने अपने सैनिकों व मंत्रियों को आदेश दिया कि देश की संपूर्ण सड़कें चमड़े से ढक दी जाएं। राजा का ऐसा आदेश सुनकर सब सकते में आ गए। लेकिन किसी ने भी मना करने की हिम्मत नहीं दिखाई। यह तो निश्चित ही था कि इस काम के लिए बहुत सारे रुपए की जरूरत थी। लेकिन फिर भी किसी ने कुछ नहीं कहा। कुछ देर बाद राजा के एक बुद्धिमान मंत्री ने एक युक्ति निकाली। उसने राजा के पास जाकर डरते हुए कहा कि मैं आपको एक सुझाव देना चाहता हूँ।
26 नवंबर 2013
चालाक महिला
एक दिन एक औरत गोल्फ खेल रही थी| जब उसने बॉल को हिट किया तो वह जंगल में चली गई|
जब वह बॉल को खोजने गई तो उसे एक मेंढक मिला जो जाल में फंसा हुआ था| मेंढक ने उससे कहा - "अगर तुम मुझे इससे आजाद कर दोगी तो मैं तुम्हें तीन वरदान दूँगा|
"महिला ने उसे आजाद कर दिया...
.
.
मेंढक ने कहा - "धन्यवाद, लेकिन तीन वरदानों में मेरी एक शर्त है जो भी तुम माँगोगी तुम्हारे पति को उससे दस गुना मिलेगा|
.
.
महिला ने कहा - "ठीक है" उसने पहला वरदान मांगा कि मैं संसार की सबसे खुबसूरत स्त्री बनना चाहती हूँ|
मेंढक ने उसे चेताया - "क्या तुम्हें पता है कि ये वरदान तुम्हारे पति को संसार का सबसे सुंदर व्यक्ति बना देगा|
.
31 जुलाई 2013
कीमती पत्थर
एक युवक कविताएँ लिखता था, लेकिन उसके इस गुण का कोई मूल्य नहीं समझता था | घरवाले भी उसे ताना मारते रहते कि तुम किसी काम के नहीं, बस कागज काले करते रहते हो | उसके अन्दर हीन-भावना घर कर गयी| उसने एक जौहरी मित्र को अपनी यह व्यथा बतायी| जौहरी ने उसे एक पत्थर देते हुए कहा – जरा मेरा एक काम कर दो | यह एक कीमती पत्थर है | कई तरह के लोगो से इसकी कीमत का पता लगाओ , बस इसे बेचना मत | युवक पत्थर लेकर चला गया| वह पहले एक कबाड़ी वाले के पास गया | कबाड़ी वाला बोला – पांच रुपये में मुझे ये पत्थर दे दो |
सदस्यता लें
संदेश (Atom)