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25 नवंबर 2012

सारा जग बेईमान !

एक बार बादशाह अकबर ने बीरबल से शान से कहा -" बीरबल हमारी जनता बेहद ईमानदार है और हमें बहुत प्यार करती है |" बीरबल ने तुरन्त उत्तर दिया - " बादशाह सलामत न तो आपके राज्य में कोई भी पूरी तरह से ईमानदार है और न ही वो आपसे ज्यादा प्यार करतें हैं |"

"यह तुम क्या कह रहे हो बीरबल ? अकबर बोले |
बीरबल  - "बादशाह सलामत ! मैं अपनी बात को साबित कर सकता हूँ |"
"ठीक है तुम हमें साबित करके दिखाओ |" बादशाह अकबर बोले |

बीरबल ने नगर में ढिंढोरा पिटवा दिया कि बादशाह सलामत एक भोज करने जा रहें हैं | उसके लिए सारी प्रजा से अनुरोध है कि कल सुबह से पहले  एक -एक लोटा दूध डालें , कड़ाहे रखवा दिये गये हैं | हर आदमी ने यही सोचा कि जहाँ इतना दूध इकट्ठा होगा वहाँ एक लोटा पानी का क्या पता चलेगा | अत : हर आदमी कड़ाहो में पानी डाल गया |

सुबह अकबर ने जब उन कड़ाहो को देखा जिसमे जनता से दूध डालने को कहा गया था  तो दंग रह गये उन कड़ाहो में केवल पानी था | और उन्हें वास्तविक स्थिति का पता चल गया |

8 टिप्‍पणियां:

  1. बादशाह सलामत को असलियत पता चल गईः)

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  2. सच है ... इसलिए अब यह निःसंकोच कहा जा सकता है - शासक का चरित्र इतना ऊँचा होना चाहिए कि स्वप्न में भी उससे कोई विश्वासघात/ धोखा करने का न सोचे। नैतिकता, सदाचारिता और चरित्रबल ऊँचा होने से प्रजा भी शासक की छोटी-छोटी इच्छाओं का ध्यान रखती है।

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  3. सारा जग बेईमान !
    :)
    वाऽह ! क्या बात है !

    बचपन में मेरे पूज्य बाबूजी सुनाया करते थे अकबर-बीरबल के किस्से
    आपने कई भूले किस्से याद दिला दिए … आभार !

    शुभकामनाओं सहित…

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  4. बोध कथा नहीं ,बोध नामा है यह तो अब कोई बीरबल नहीं है न कोई अकबर .

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