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8 जून 2016

धन, सफलता और प्रेम

एक औरत ने तीन संतों को अपने घर के सामने देखा। वह उन्हें जानती नहीं थी। औरत ने कहा – “कृपया भीतर आइये और भोजन करिए।” संत बोले – “क्या तुम्हारे पति घर पर हैं?” औरत – “नहीं, वे अभी बाहर गए हैं।” संत –“हम तभी भीतर आयेंगे जब वह घर पर हों।” शाम को उस औरत का पति घर आया और औरत ने उसे यह सब बताया।

पति – “जाओ और उनसे कहो कि मैं घर आ गया हूँ और उनको आदर सहित बुलाओ।” औरत बाहर गई और उनको भीतर आने के  लिए कहा। संत बोले – “हम सब किसी भी घर में एक साथ नहीं जाते।” “पर क्यों?” – औरत ने पूछा। उनमें से एक संत ने कहा – “मेरा नाम धन है |”

फ़िर दूसरे संतों की ओर इशारा कर के कहा – “इन दोनों के नाम सफलता और प्रेम हैं। हममें से कोई एक ही भीतर आ सकता है। आप घर के अन्य सदस्यों से मिलकर तय कर लें कि भीतर किसे निमंत्रित करना है।”

25 अप्रैल 2016

परिश्रम और भाग्य की चाबी

एक पान वाला था। जब भी पान खाने जाओ ऐसा लगता कि वह हमारा ही रास्ता देख रहा हो। हर विषय पर बात करने में उसे बड़ा मज़ा आता। कई बार उसे कहा की भाई देर हो जाती है जल्दी पान लगा दिया करो पर उसकी बात ख़त्म ही नही होती। एक दिन अचानक कर्म और भाग्य पर बात शुरू हो गई।  तक़दीर और तदबीर की बात सुन मैनें सोचा कि चलो आज उसकी फ़िलासफ़ी देख ही लेते हैं। मैंने एक सवाल उछाल दिया।
 
मेरा सवाल था कि आदमी मेहनत से आगे बढ़ता है या भाग्य से? और उसके जवाब से मेरे दिमाग़ के सारे जाले ही साफ़ हो गए। कहने लगा,आपका किसी बैंक में लाकर तो होगा? उसकी चाभियाँ ही इस सवाल का जवाब है। हर लाकर की दो चाभियाँ होती हैं। एक आप के पास होती है और एक मैनेजर के पास। आप के पास जो चाभी है वह है परिश्रम और मैनेजर के पास वाली भाग्य। जब तक दोनों नहीं लगतीं ताला नही खुल सकता। आप कर्मयोगी पुरुष हैं ओर मैनेजर भगवान। 

19 अप्रैल 2016

माँ तो बस माँ होती है

आधी रात को बहुत बारिश हो रही थी। अजय और उसकी बीवी प्रिया एक मित्र की पार्टी से अपनी गाडी से घर वापस लौट रहे थे.. बारिश की वजह से अजय बहुत धीमी गति से गाड़ी चला रहा था, तभी अचानक बिजली गिरी.. बिजली की रोशनी में अजय को गाड़ी के सामने एक बदहवास सी एक औरत दिखाई दी.. अजय ने गाड़ी रोक दी..! गाड़ी रुकने पर उसकी बीवी ने कहा :- क्या हूआ..? गाड़ी क्यों रोक दी..? 

अजय ने आगे की ओर इशारा किया। प्रिया ने आगे देखा तो वो डर गयी, क्यों कि गाड़ी के सामने एक औरत खड़ी थी। वो औरत गाड़ी के पास आयी, और हाथ से गाड़ी का शीशा नीचे करने का इशारा करने लगी। अजय की बीवी प्रिया काफी डर गयी थी, उसने अजय को गाडी चलाने को कहा, लेकिन गाड़ी भी स्टार्ट नही हुईं। गाड़ी के बाहर खडी औरत बारिश की वजह से भींग गयी थी। वो हाथ जोडकर गाड़ी का शीशा नीचे करने का इशारा कर रही थी।
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