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4 मई 2013

लालच का फल

किसी वन में एक शेर रहता था | शेर बहुत बूढ़ा था | उसके दांत गिर चुके थे | उसके नाखून गल गये थे तथा उसके शरीर में शिकार करने की शक्ति शेष नहीं बची थी | शेर शारीरिक दुर्बलता के कारण भूखा मरने लगा | शेर को एक युक्ति सूझी |

शेर के पास एक सोने का कड़ा था | शेर सोने का कड़ा लेकर रास्ते के किनारे एक तालाब में बैठ गया | उस मार्ग से जो भी राहगीर गुजरता , शेर उसे कड़े का लालच देता | शेर तो आखिर शेर होता है | उसके पास किसी की जाने की हिम्मत नहीं होती थी | उसे शाम हो गयी लेकिन कोई व्यक्ति उसके पास नहीं भय से नहीं आया | शाम के समय एक ब्राह्मण उधर से गुजरा | शेर ने ब्राह्मण से कहा , “ हे ब्राह्मण देवता ! मेरी बात सुनो , मैंने अपने जीवन में बहुत से पाप किये हैं और मै उनका पश्चाताप करना चाहता हूँ | मैं यह सोने का कंगन एक पवित्र आदमी को देना चाहता हूँ और वह तुम हो |”

ब्राह्मण बोला , “ मुझे क्या पागल समझते हो , मैं जैसे ही तुम्हारे पास आऊँगा , तुम मुझे मारकर खा जाओगे |” शेर बोला , “ नहीं ब्राह्मण देवता ! ऐसा नहीं हो सकता | मेरे नाखून गलकर टूट चुके हैं  तथा दांत भी गिर चुके हैं | इसलिए मैं तुम्हे नहीं मार सकता |” ब्राह्मण को शेर की बातों पर विश्वास हो गया | वह कड़ा लेने के लिए तालाब में पहुँच गया | शेर ने सोचा अच्छा मौका है | शेर उसे मारकर खा गया |

किसी ने सच ही कहा है कि लालच बुरी बात है | लालची व्यक्ति लालच के कारण अपने प्राण भी गवाँ देता है | इसलिए हमें कभी भी जीवन में लालच नहीं करना चाहिए |

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (05-05-2013) के चर्चा मंच 1235 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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