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17 जुलाई 2012

बाज़ की उड़ान

एक बार की बात है कि एक बाज का अंडा  मुर्गी के अण्डों के बीच आ गया| कुछ दिनों  बाद उन अण्डों में से चूजे निकले, बाज का बच्चा भी उनमे से एक था| वो उन्ही के बीच बड़ा होने लगा| वो वही करता जो बाकी चूजे करते, मिटटी में इधर-उधर खेलता, दाना चुगता और दिन भर उन्हीकी तरह चूँ-चूँ करता| बाकी चूजों की तरह वो भी बस थोडा सा ही ऊपर उड़ पाता , और पंख फड़-फडाते हुए नीचे आ जाता | फिर एक दिन उसने एक बाज को खुले आकाश में उड़ते हुए देखा, बाज बड़े शान से बेधड़क उड़ रहा था|
तब उसने बाकी चूजों से पूछा, कि-
 ” इतनी उचाई पर उड़ने वाला वो शानदार पक्षी कौन है?”

तब चूजों ने कहा-” अरे वो बाज है, पक्षियों का राजा, वो बहुत ही ताकतवर और विशाल है, लेकिन तुम उसकी तरह नहीं उड़ सकते क्योंकि तुम तो एक चूजे हो!

बाज के बच्चे ने इसे सच मान लिया और कभी  वैसा बनने की कोशिश नहीं की| वो ज़िन्दगी भर चूजों की तरह रहा, और एक दिन बिना अपनी असली ताकत पहचाने ही मर गया|

दोस्तों, हममें से बहुत से लोग  उस बाज की तरह ही अपना असली सामर्थ्य जाने बिना एक औसत दर्जे से नीचे ज़िन्दगी जीते रहते हैं मगर हम में ये भूल जाते हैं कि हम अपार संभावनाओं से पूर्ण एक प्राणी हैं| हमारे लिए इस जंग में कुछ भी असंभव नहीं है,पर फिर भी बस एक औसत जीवन जी के हम इतने बड़े मौके को गँवा देते हैं|

आप चूजों  की तरह मत बनिए, अपने आप पर ,अपनी काबिलियत पर भरोसा कीजिए| आप चाहे जहाँ हों, जिस परिवेश में हों, अपनी क्षमताओं को पहचानिए और आकाश की ऊँचाइयों पर उड़ कर  दिखाइए  क्योंकि यही आपकी वास्तविकता है|


5 टिप्‍पणियां:

  1. उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के चर्चा मंच पर ।।

    आइये-

    सादर ।।

    आदरणीय पाठक गण !!

    किसी भी लिंक पर टिप्पणी करें ।

    सम्बंधित पोस्ट पर ही उसे पेस्ट कर दिया जायेगा 11 AM पर-

    उत्तर देंहटाएं
  2. चूजा होकर भी
    बाज बना जाता है
    कुछ पाना हो तो
    बड़ा सोचने में
    क्या जाता है ।।

    उत्तर देंहटाएं
  3. चिड़ियों की कारागार में फँसा हुआ है बाज।
    सभ्यता के कोढ़ में होने लगी है खाज।।

    उत्तर देंहटाएं
  4. अगर चूजे ने खुद को बाज मान के उड़ान भर ली तो उसका क्या हश्र होने वाला है ... इसलिए पहले अपनी सही पचान होना बहुत जरूरी है ...

    उत्तर देंहटाएं

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